वेब सीरीज: दिल्ली क्राइम सीजन 3
कलाकार: शेफाली शाह, हुमा कुरैशी, रसिका दुग्गल, राजेश तैलंग, शायोनी गुप्ता आदि।
निर्देशक: तनुज चोपड़ा
क्रिएटर: रिची मेहता प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स
अवधि: 7 एपिसोड्स (औसतन 40 मिनट प्रति एपिसोड)
वर्डिक्ट: *** (3 स्टार)
मनोज वशिष्ठ, मुंबई। नेटफ्लिक्स की क्राइम थ्रिलर सीरीज दिल्ली क्राइम का तीसरा सीजन देखने लायक तो है, लेकिन यह पहले सीजन की तरह चुभने वाला और यादगार नहीं है, जो दिल्ली की कुख्यात निर्भया केस से प्रेरित था।
दिल्ली में ही 2012 में हुए बेबी फलक केस से प्रेरित तीसरे सीजन की कहानी मानव तस्करी के इर्दगिर्द घूमती है और दिल्ली से हरियाणा, असम, गुजरात होते हुए महाराष्ट्र तक सफर करती है।
कैसी है शो की कहानी?
यह असम में तैनात डीजीपी वर्तिका चतुर्वेदी (शेफाली शाह) की टीम और लड़कियों की तस्करी करने वाली खतरनाक और शातिर अपराधी मीना चौधरी (हुमा कुरैशी) के बीच रन एंड चेज की कहानी है, जो असम से शुरू होकर दिल्ली और सूरत होते हुए मुंबई जाकर खत्म होती है, जहां 30 लड़कियों को एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट को बेचे जाने से छुड़ाने की कोशिश की जाती है।
कहानी में ज्यादा मोड़ नहीं है, सीधी-सपाट है, जो कलाकारों के बेहतरीन अभिनय के दम पर अपनी छाप छोड़ती है। सीरीज के लगभग हर कलाकार ने अपने किरदार को ऑथेंटिसिटी के साथ निभाया और यही इकलौती वजह है कि आप इसके 7 एपिसोड पूरे देखते जाते हैं।
मानव तस्करी का मुद्दा आपराधिक होने के साथ सामाजिक भी है और फिल्ममेकर समय-समय पर इस विषय को फिल्मों और टीवी शोज के जरिए उठाते रहे हैं। मर्दानी, लव सोनिया, फ्लेश वेब सीरीज मानव तस्करी के विषय को रेखांकित करती हैं।
इनमें से कुछ कहानियां काल्पनिक होती हैं तो कुछ सच्ची घटनाओं से प्रेरित, मगर सभी कहानियों का सार एक ही होता है कि मजबूरी में फंसी लड़कियों और महिलाओं को कोई झांसा देकर बेच देना।
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कैसा है कलाकारों का अभिनय?
शेफाली शाह, रसिका दुग्गल, राजेश तैलंग, जया भट्टाचार्य, अनुराग अरोड़ा ने तीसरे सीज़न में अपने किरदारों को बेहद विश्वसनीय तरीके से निभाया है। हुमा कुरैशी, जो रोहतक की हरियाणवी बोलने वाली विलेन मीना उर्फ बड़ी दीदी के रूप में हैं, अच्छी हैं लेकिन इस भूमिका में पूरी तरह परफेक्ट नहीं दिखतीं।
महारानी 4 में बिहार की तेज तर्रार नेता के बाद मावन तस्कर बनीं हुमा का अभिनय ठीक है, लेकिन इस तरह के खतरनाक किरदार के लिए जिस भय का एहसास जरूरी होता है, वो नहीं पैदा हो पाता।
मेरे लिए इस सीजन की शोस्टीलर मीता वशिष्ठ हैं, जो कल्याणी का किरदार निभाती हैं—मीना की चालाक और शातिर सप्लायर, जो दिल्ली के उत्तम नगर में रहती है। स्क्रीन टाइम कम होने के बावजूद, जब भी वह स्क्रीन पर आती हैं—अपनी दमदार परफॉर्मेंस से पूरी तरह छा जाती हैं।
इस सीजन की एक और अहम कास्ट में शामिल शायोनी गुप्ता, जो मीना की विश्वसनीय सहयोगी कुसुम बनी हैं। शायोनी स्क्रीन पर काफी रफ और तेज दिखती हैं, जिससे उनका किरदार दिलचस्प बन गया है।

कैसा है तनुज चोपड़ा का निर्देशन?
डायरेक्टर तानुज चोपड़ा ने इस सीजन को ज्यादातर टाइट क्लोजअप में शूट किया है, ताकि भावनाओं को कैद किया जा सके और यह तरीका कामयाब रहा, क्योंकि इससे किरदार और भी वास्तविक लगते हैं।
सीरीज की कलर टोन उदासी लिये हुए रखी गई है, जो इसके माहौल और गंभीर कहानी को और प्रभावी बनाती है। तनुज ने किरदारों को उनके खांचे से बाहर नहीं होने दिया है। सबसे कैरेक्टर स्केच डिफाइंड हैं। हालांकि, मुख्य विलेन बड़ी दीदी का अतीत संवादों के जरिए ही दिखाया गया है, जो क्लाइमैक्स में है। तनुज ने इस किरदार को एक्सप्लोर करने की कोशिश नहीं है।

