The Family Man Season 3 Review: श्रीकांत तिवारी की स्पाइ स्टोरी में कहां रह गई कमी… पढ़िए, द फैमिली सीजन 2 का रिव्यू

The Family Man Season 3 Review. Photo- X
वेब सीरीज़: द फैमिली मैन सीज़न 3 
कलाकार: मनोज बाजपेयी, शारिब हाशमी, प्रियामणि, दलीप ताहिल, जयदीप अहलावत, निमरत कौर, जुगल हंसराज आदि। 
निर्देशक: राज एवं डीके
लेखक: सुमन कुमार 
प्लेटफॉर्म: अमेजन प्राइम वीडियो 
अवधि: 7 एपिसोड, लगभग 1 घंटे प्रति एपिसोड 
वर्डिक्ट: ⭐️⭐️⭐️

मनोज वशिष्ठ, मुंबई। पिछले हफ्ते नेटफ्लिक्स की बहुचर्चित सीरीज दिल्ली क्राइम का सीजन 3 रिलीज हुआ था और आज (शुक्रवार) प्राइम वीडियो के लोकप्रिय शो द फैमिली मैन का सीजन 3 भी आ गया है। दोनों ही शोज अपनी तेज-रफ्तार कहानी और कलाकारों के दमदार अभिनय के लिए जाने जाते हैं।

लेकिन, इन नए सीजन्स के साथ दोनों शोज अपनी कहानी के स्तर पर थोड़े कमजोर होते दिखाई दे रहे हैं। इन्हें देखने का सबसे बड़ा कारण अब भी शानदार अभिनय ही है।

क्या है तीसरे सीजन की कहानी?

द फैमिली मैन सीजन 3, जो बीती रात 12 बजे प्राइम वीडियो पर रिलीज हुआ, जासूसी और परिवार—दोनों पर बराबर केंद्रित है। काल्पनिक इंटेलिजेंस एजेंसी TASK का सीनियर एनालिस्ट श्रीकांत तिवारी अपने काम और परिवार—दोनों मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं।

इस बार श्रीकांत को किसी संकट का हल करने नहीं भेजा जाता, बल्कि वह उसी व्यवस्था का शिकार बन जाता है, जिसका वो हिस्सा रहा है। वह अपने सीनियर कुलकर्णी की हत्या का मुख्य आरोपी बन जाता है, जिनके साथ वह विद्रोही समूहों के साथ शांति वार्ता के लिए नागालैंड जाता है।

आतंकी हमले में अकेले जीवित बचने की वजह से विभाग उसे प्रशासनिक अवकाश पर भेज देता है और हत्या का प्राइम सस्पेक्ट मान लेता है।

अपने पिता समान बॉस की मौत और विभाग के अविश्वास से टूट चुके श्रीकांत को अपना नाम साफ करने और अपने सीनियर की मौत का बदला लेने के लिए असली अपराधियों का पता लगाना होगा, लेकिन यह आसान नहीं है—क्योंकि दिल्ली से आया अधिकारी यात‍िश चावला इस जांच को अपने हाथ में ले चुका है, और वह श्रीकांत को पसंद नहीं करता।

गिरफ्तारी से बचने के लिए श्रीकांत को अपने परिवार के साथ भागना पड़ता है और दो-चार सहयोगियों के अलावा उसके पास कोई नहीं, जिस पर भरोसा कर सके।

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कैसी है शो की कहानी और स्क्रीनप्ले?

इस बार की कहानी मुंबई से दिल्ली होते हुए नागालैंड तक जाती है। मुख्य एक्शन नागालैंड और म्यांमार में सेट किया गया है। यह सीजन उत्तर-पूर्वी राज्यों में उग्रवाद और अस्थिरता, चीन की बढ़ती दखलअंदाजी, राजनीतिक भ्रष्टाचार, रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार और यहां तक कि चीनी ऐप्स जैसे मुद्दों को भी छूता है।

संयोग से हाल के कई शोज का फोकस उत्तर और उत्तर-पूर्व भारत पर बढ़ा है—जैसा कि हमने पाताल लोक और दिल्ली क्राइम के पिछले सीज़न्स में भी देखा, और अब द फैमिली मैन 3 में भी।

जैसे ही जयदीप अहलावत नागालैंड के ड्रग लॉर्ड और भाड़े के लड़ाके के रूप में स्क्रीन पर आते हैं, दर्शकों को अनायास ही पाताल लोक 2 का हाथीराम चौधरी याद आ जाता है—जो एक हाई-प्रोफाइल केस को इसी तरह की तनावपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक उथलपुथल में सुलझा रहा था।

कहानी के लिहाज से द फैमिली मैन 3 कुछ नया पेश नहीं करता। इसी तरह की कहानियां जासूसी फिल्मों में कई बार दिख चुकी हैं—बागी एजेंट, राजनीतिक साजिशों में फंसाए गए ऑपरेटिव और पड़ोसी देशों का भारत की आंतरिक समस्याओं का फायदा उठाना।

श्रीकांत के परिवार की कहानी में भी कोई खास नयापन नहीं है। पिछले सीजन्स का जो ड्रामा और हास्य बेहद सफल था, वह इस बार कमजोर लगता है। कुछ हास्य दृश्य रखे गए हैं, लेकिन वे प्रभाव नहीं छोड़ते।

पहले कुछ एपिसोड्स की गति धीमी लगती है, लेकिन जैसे ही श्रीकांत परिवार के साथ भागता है और एक्शन नागालैंड व म्यांमार शिफ्ट होता है, कहानी रफ्तार पकड़ लेती है और रोमांच लौट आता है।

कैसा है कलाकारों का अभिनय?

मनोज बाजपेयी एक बार फिर श्रीकांत तिवारी के रूप में शानदार प्रदर्शन करते हैं। उनके साथी जेके की भूमिका शारिब हाशमी बखूबी निभाते हैं। जयदीप अहलावत को शुरू में ड्रग लॉर्ड के रूप में स्वीकारना थोड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन कुछ दृश्यों के बाद वे इस भूमिका में पूरी तरह फिट लगते हैं।

श्रिया धनवन्तरि इस सीजन में एक बार फिर जोया अली के रूप में लौटती हैं और इस बार उनके किरदार में एक-दो नई परतें देखने को मिलती हैं।

निमरत कौर, अहलावत के साथ मुख्य विलेन की भूमिका निभाती हैं। सरकारों और बड़ी कंपनियों के लिए काम करने वाली एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय फिक्सर के रूप में वे पर्दे के पीछे से सारा गेम खेलती हैं। उनका अभिनय मजबूत और प्रभावशाली है।

जुगल हंसराज लंदन स्थित एक आर्म्स कारोबारी के रूप में कम समय के लिए नजर आते हैं। निमरत का किरदार मीरा एस्टन उनके लिए काम करता है। दोनों ऐसे लोगों से जुड़े हैं, जो उत्तर-पूर्व में शांति नहीं चाहते, ताकि भारत के साथ उनका हथियारों का कारोबार प्रभावित ना हो।

तेलुगु अभिनेता संदीप किशन (मेजर विक्रम), तमिल स्टार विजय सेतुपति (आईपीएस माइकल) और उदय महेश (चेल्लम सर) अपनी झलक से भी दर्शकों का मन मोह लेते हैं।

कैसा है द फैमिली मैन का तीसरा सीजन?

कुल मिलाकर, राज एंड डीके द्वारा बनाया और निर्देशित द फैमिली मैन 3 देखने लायक है, भले ही यह पिछले दो सीजन्स जितना बिंज-वर्थी ना हो। अगर आप कहानी से बहुत अधिक उम्मीद ना रखें तो आप निराश नहीं होंगे।

पिक्चर अभी बाकी है…

सीजन एक क्लिफहैंगर पर खत्म होता है। इस बार कहानी पूरी नहीं होती: ऑपरेशन के दौरान रुक्मा की गोली लगने के बाद घायल श्रीकांत म्यांमार के जंगल में फंसा रह जाता है। भले ही उस पर लगे आरोप हटा दिए जाते हैं और यत‍ीश की पोल खुलने के बाद उसका गिरफ्तारी वारंट भी रद्द हो जाता है, लेकिन कई धागे अभी खुलने बाकी हैं।

रुक्मा भी घायल है और अब भी फरार है। उसका बदला अधूरा है। प्रधानमंत्री के भ्रष्ट सहयोगी सम्बित (विपिन शर्मा) का पर्दाफाश भी होना बाकी है।

तैयार रहिए, द फैमिली मैन सीजन 4 के लिए। पहली बार राज एंड डीके ने कहानी को एक ही सीजन में खत्म नहीं किया है।