Dharmendra in Ikkis: इक्कीस में आखिरी बार अपनी लिखी कविता सुनाएंगे धर्मेंद्र, अगले महीने रिलीज होगी फिल्म

Dharmendra's last poem in IKKIS. Photo- Instagram

मुंबई। Dharmendra in Ikkis: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का 24 नवम्बर को निधन हो गया। उनके जाने का गम फैंस अब तक मना रहे हैं। सोशल मीडिया में निरंतर धर्मेंद्र की सिनेमाई विरासत और शख्सियत को याद किया जा रहा है। कोई उनकी फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात कर रहा है तो कोई उनके गरिमामयी व्यक्तित्व को याद कर रहा है।

धर्मेंद्र की एक साइड और थी, जिसके बारे में कम ही बात हुई है। उन्हें शेरो-शायरी का बहुत शौक था। खुद लिखते भी थे। कुछ मौकों पर उन्होंने अपना लिखा सुनाया भी है। धर्मेंद्र के इस हुनर की बानगी आने वाली फिल्म इक्कीस में देखने-सुनने को मिलेगी।

इक्कीस में धर्मेंद्र सुनाएंगे अपनी कविता

सिनेमा में 60 साल से ज्यादा बिता चुके धर्मेंद्र इस फिल्म के जरिए आखिरी बार बड़े पर्दे पर लौटेंगे। मेकर्स ने फिल्म का नया टीजर जारी किया है, जिसमें धर्मेंद्र पंजाबी में लिखी अपनी कविता सुना है। इस कविता में अपनी जड़ों की ओर लौटने की कसक छिपी है।

कविता के मुखड़ा ‘अज भी जी करदा है, पिंड अपने नू जांवा’ है। जिस मिट्टी में खेले, जिन गलियों में बचपन बीता, एक उम्र गुजर जाने के बाद उसकी बहुत याद आती है। वो तड़प दिल में टीस जगाती है। धर्मेंद्र की कविता का कुछ यही भाव है।

यह भी पढ़ें: जब भरी दोपहरी चोरी से Dilip Kumar के बंगले में घुस गये थे 17 साल के Dharmendra, ‘शहीद’ देखकर चढ़ा था हीरो बनने का जुनून

शहीद फौजी के पिता के किरदार में धर्मेंद्र

इक्कीस 1971 भारत-पाक युद्ध से निकली एक वॉर फिल्म है, जिसमें परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की कहानी दिखाई जाएगी। अगस्त्य नंदा अरुण खेत्रपाल के किरदार में हैं, जबकि धर्मेंद्र उनके पिता ब्रिगेडियर एमएल खेत्रपाल के रोल में हैं।

शहीद खेत्रपाल का परिवार पश्चिमी पंजाब के सरगोधा गांव का रहने वाला था, जो बंटवारे के बाद भारत आ गया था। फिल्म की कहानी कुछ यूं है कि सालों बाद एमएल खेत्रपाल पाकिस्तान स्थित गांव में अपने पुश्तैनी घर को देखने जाते हैं। वहां, एक पाकिस्तानी अफसर (जयदीप अहलावत) के घर ठहरते हैं, जो उन्हें उनका घर दिखाने में मदद करते हैं। सम्भवत: धर्मेंद्री की कविता उसी घटनाक्रम के संदर्भ में है।

धर्मेंद्र के निधन के ठीक एक महीने बाद 25 दिसम्बर को रिलीज हो रही फिल्म का निर्देशन श्रीराम राघवन ने किया है, जबकि निर्माण मैडॉक फिल्म्स के तहत दिनेश विजन ने किया है।