मुंबई। MM Baig Death: बॉलीवुड के वयोवृद्ध फिल्मकार एमएम बेग का इस सप्ताह की शुरुआत में निधन हो गया। उनके पब्लिसिस्ट हनीफ जवेरी ने बताया कि बेग अपने घर में मृत पाए गए। वह 70 वर्ष के आसपास थे और कुछ समय से अस्वस्थ थे।
पड़ोसियों ने घर से दुर्गंध आने की शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया और उनका शव बरामद किया। बेग अकेले रहते थे और चार-पांच दिनों से घर से बाहर नहीं निकले थे।
एमएम बेग कौन थे?
एमएम बेग हिंदी सिनेमा के एक प्रमुख व्यक्ति थे, जो मुख्य रूप से पर्दे के पीछे काम करते थे। उन्होंने 1980 के दशक में अपने करियर की शुरुआत की और कई प्रसिद्ध फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में योगदान दिया। वह पूर्व बाल कलाकार बेबी गुड्डू के पिता भी थे, जिन्होंने 1980 के दशक में कई हिट फिल्मों में काम किया था।
करियर की शुरुआत और योगदान
बेग ने जे ओम प्रकाश (ऋतिक रोशन के नाना), विमल कुमार और राकेश रोशन जैसे निर्देशकों के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। उन्होंने गोविंदा अभिनीत फिल्मों जैसे ‘आदमी खिलौना है’ (1993), ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ (1989), ‘कर्ज चुकाना है’ (1991), अनिल कपूर की ‘काला बाजार’ (1989) और ‘किशन कन्हैया’ (1990) में योगदान दिया।
इसके अलावा वह ‘रजिया सुल्तान’ (1983) जैसी फिल्मों से जुड़े थे। स्वतंत्र निर्देशक के रूप में, बेग ने दो फिल्में निर्देशित कीं। पहली ‘मासूम गवाह’ (1990) थी, जिसमें नसीरुद्दीन शाह मुख्य भूमिका में थे, लेकिन यह फिल्म रिलीज नहीं हो सकी।
दूसरी ‘छोटी बहू’ (1994) थी, जिसमें शिल्पा शिरोडकर और दीपक तिजोरी ने अभिनय किया। उन्होंने कुछ फिल्मों में लेखक के रूप में भी काम किया, जैसे ‘दोस्त गरीबों का’ (1989) और ‘सौतन’ (1983)।
ऋतिक रोशन की दी डिक्शन की ट्रेनिंग
बेग ने ऋतिक रोशन को उनके डेब्यू फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ (2000) के लिए डिक्शन कोचिंग दी थी, क्योंकि वह राकेश रोशन के साथ काम कर चुके थे। यह योगदान ऋतिक के करियर की शुरुआत में महत्वपूर्ण रहा।
एक्टर ने वेटरन फिल्ममेकर के निधन पर अफसोस जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। ऋतिक ने एक्स पर लिखा- मेरे प्यारे बेग जी, मैं आपका हमेशा आभारी रहूंगा। अभिनेता के तौर पर करियर की शुरुआत में जैसा गुरु चाहिए होता है, वैसा बनने के लिए। आपने मुझे स्पीच और डिलवरी में आत्मविश्वास जगाने में मदद की।
मेरे अंदर के अभिनेता को आकार देने और मेरे अंदर का संकोच खत्म करने और कमजोरियों को जीतने में आपकी भूमिका अहम रही। मैं तो खो चुका था और आपने रास्ता खोजने में मेरी मदद की। उस समय मैं सिर्फ 18 साल का था। मैं आज भी उन पाठों को याद करता हूं। आपकी बहुत याद आएगी।
मेरे गुरु- एमएम बेग, आपको शांति मिले। मेरी संवेदनाएं बेग परिवार के साथ हैं।
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एमएम बेग की पत्नी का नाम मुमताज बेग था। उनकी बेटी शाहिदा बेग, जिन्हें बेबी गुड्डू के नाम से जाना जाता है, का जन्म 1980 में हुआ। उन्होंने ‘इंसाफ का तराजू’, ‘दो प्रेमी’, ‘आखिर क्यों?’, ‘नगीना’, ‘प्यार किया है प्यार करेंगे’, ‘औलाद’ और ‘कुदरत का कानून’ जैसी फिल्मों में काम किया।
उनकी आखिरी फिल्म ‘इंस्पेक्टर धनुष’ (1991) थी। वर्तमान में, वह दुबई में एक एयरलाइन में एयर होस्टेस के रूप में काम कर रही हैं।

निधन और प्रतिक्रियाएं
बेग कुछ समय से बीमार थे और अकेले रह रहे थे। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई। हनीफ जावेरी ने कहा, “वह एक प्यारे इंसान थे। मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।” पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना जताई गई है।

