Explainer: क्यों हो रही है संगीत सम्राट AR Rahman की मुस्लिम पहचान पर चर्चा? जानिए- इस विवाद से जुड़ा हर पहलू

Know all about AR Rahman controversy. Photo- X

मुंबई। AR Rahman Controversy Explainer: एआर रहमान, जिन्हें ‘मद्रास का मोजार्ट’ कहा जाता है, भारतीय संगीत जगत की एक दिग्गज हस्ती हैं। ऑस्कर विजेता इस संगीतकार ने हिंदी, तमिल और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में अपनी धुनों से करोड़ों दिलों को जीता है, लेकिन हाल ही में रहमान के एक इंटरव्यू ने बवाल मचा दिया है।

रहमान ने एक साक्षात्कार में बॉलीवुड में काम कम मिलने का कारण ‘सांप्रदायिक पूर्वाग्रह’ बताकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। यह बयान ना केवल बॉलीवुड में चर्चा का विषय बना, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आईं।

इस लेख में हम इस विवाद के सभी पहलुओं को कवर करेंगे- रहमान के बयान से लेकर प्रतिक्रियाएं, उनके आगामी प्रोजेक्ट्स और उद्योग पर प्रभाव तक।

कैसे हुई विवाद की शुरुआत?

बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार में रहमान ने खुलासा किया कि पिछले आठ सालों (2018 से 2026 तक) में हिंदी फिल्मों में उनके लिए काम कम हो गया है। उन्होंने कहा, “पावर शिफ्ट हो गया है और अब गैर-क्रिएटिव लोग पावर में हैं। मुझे चाइनीज व्हिस्पर्स सुनाई देते हैं… यह सांप्रदायिक चीज हो सकती है, लेकिन मेरे चेहरे पर नहीं।”

रहमान ने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन उद्योग में बदलते समीकरणों और ‘सांप्रदायिक फुसफुसाहटों’ ने उनके अवसरों को प्रभावित किया।

उन्होंने यह भी कहा कि वे ऐसे फिल्मों से दूर रहते हैं, जो ‘बुरे इरादों’ से बनाई जाती हैं। इसके अलावा, रहमान ने अपनी हालिया फिल्म ‘छावा’ पर टिप्पणी की, जो विक्की कौशल अभिनीत एक ऐतिहासिक ड्रामा है। उन्होंने इसे ‘विभाजनकारी’ बताते हुए कहा, “यह एक विभाजनकारी फिल्म है। मुझे लगता है कि इसने विभाजन पर कैश किया, लेकिन इसका मूल उद्देश्य बहादुरी दिखाना है।”

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फिल्म, जो छत्रपति संभाजी महाराज की जिंदगी पर आधारित है, को रिलीज के समय इतिहास की तोड़-मरोड़ के आरोपों का सामना करना पड़ा था। रहमान ने फिल्म में धार्मिक वाक्यों जैसे ‘सुब्हानल्लाह’ और ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ के इस्तेमाल पर भी सफाई दी।

रहमान ने अपनी मुस्लिम पहचान पर भी बात की। खासकर आगामी फिल्म ‘रामायण’ में काम करने के संदर्भ में। ट्रोल्स ने उन पर सवाल उठाए कि एक मुस्लिम होने के नाते वे हिंदू महाकाव्य पर काम कैसे कर सकते हैं। जवाब में रहमान ने कहा, “मैं मुस्लिम हूं… लेकिन कला और ज्ञान धर्म की सीमाओं से परे हैं। रामायण एक उच्च सिद्धांतों वाली कहानी है।”

उन्होंने जोर दिया कि रामायण धर्म से ज्यादा नैतिकता और बहादुरी की कहानी है।

रहमान के इंटरव्यू पर किसने क्या कहा?

रहमान के बयान ने बॉलीवुड और बाहर दोनों जगह हलचल मचा दी। कई सेलिब्रिटीज ने इसे ‘खतरनाक’ बताया, जबकि कुछ ने समर्थन किया।

शोभा डे: लेखिका और स्तंभकार शोभा डे ने रहमान के बयान को ‘बहुत खतरनाक’ करार दिया। उन्होंने कहा, “धर्म काम मिलने में फैक्टर नहीं है। मैं 50 साल से बॉलीवुड देख रही हूं, यहां टैलेंट मायने रखता है।” डे ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में यह टिप्पणी की।

शान: गायक शान ने कहा, “संगीत में कोई अल्पसंख्यक एंगल नहीं है। केवल अच्छा काम चमकता है।” उन्होंने रहमान के बयान पर अलग नजरिया रखा।

जावेद अख्तर: गीतकार जावेद अख्तर ने रहमान के ‘सांप्रदायिक’ टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, लेकिन उन्होंने कहा कि रहमान ने व्यक्तिगत भेदभाव का सामना नहीं किया।

कंगना रनौत: अभिनेत्री कंगना ने रहमान को ‘पूर्वाग्रही और घृणित’ बताया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर किया कि अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ के लिए रहमान से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया और इसे ‘प्रोपगैंडा फिल्म’ कहा। कंगना ने कहा कि आप अपनी नफरत में अंधे हो गये थे।

हरिहरन और अन्य: गायक हरिहरन ने रहमान के बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे उद्योग की बदलती गतिशीलता से जोड़ा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने रहमान को ‘घरवापसी’ की सलाह दी, अगर वे काम चाहते हैं। उन्होंने रहमान पर एक खास गुट से जुड़ने और उद्योग को बदनाम करने का आरोप लगाया।

एआर रहमान के आगामी प्रोजेक्ट्स में ‘रामायण’ के अलावा, ‘पेद्दी’, ‘लाहौर 1947’ और हंस जिमर के साथ सहयोग शामिल हैं। उन्होंने हाल ही में ‘मूनवॉक’ फिल्म का गाना ‘मयिले’ रिलीज किया।

इंडस्ट्री पर प्रभाव

यह विवाद बॉलीवुड में सांप्रदायिकता, कॉरपोरेटाइजेशन और क्रिएटिविटी के मुद्दों को उजागर करता है। क्या यह वास्तविक पूर्वाग्रह है या रहमान की व्यक्तिगत निराशा है? कई का मानना है कि बॉलीवुड में खान तिकड़ी का दबदबा रहमान के दावे को चुनौती देता है।

फिर भी, यह बहस उद्योग में विविधता और समावेशिता पर नए सिरे से विचार करने का अवसर दे सकती है। रहमान जैसे लीजेंड को सम्मान मिलना चाहिए, लेकिन बयान जिम्मेदारी से दिए जाने चाहिए।यह विवाद दिखाता है कि कला और राजनीति के बीच की रेखा कितनी पतली है। क्या रहमान का बयान बदलाव लाएगा या सिर्फ विवाद? समय बताएगा।