मुंबई। Saaz Based on Asha Lata Raivalry: हिंदी सिनेमा की दिग्गज पार्श्व गायिका आशा भोसले ने रविवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया और अपने पीछे छोड़ गईं सुरों की ऐसी विरासत, जो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। वहीं, उनके चाहने वालों को हमेशा संगीत के करीब रखेगी।
आशा के निधन से ठीक 4 साल पहले 2022 में उनकी बड़ी बहन और हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर यह दुनिया छोड़कर चली गई थीं। इन दोनों मंगेशकर बहनों ने सिनेमा को जो दिया, उसकी बराबरी शायद ही कोई कर पाये, मगर सफलता की बुलंदी के सफर में कुछ विवाद भी इनके हमसफर हो चले थे।
चर्चित रही लता-आशा की प्रतिद्वंद्विता
दोनों बहनों के बीच प्रतिद्वंद्विता अक्सर गॉसिप मैगजीनों और कॉलम्स का हिस्सा रही। कहा गया कि लता मंगेशकर की प्रतिभा के वटवृक्ष के साये में आशा नाम के पौधे को पनपने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस पौधे को फलने-फूलने के लिए जिस खाद-पानी और धूप की जरूरत थी, वो बड़ी बहन ने नहीं दिया। आशा ने नाम और पहचान अपने दम पर कायम की।
लता-आशा पर आधारित थी साज?
1998 में एक फिल्म आई थी साज, जिसका निर्देशन सई परांजपे ने किया था। कहा गया कि यह फिल्म लता और आशा के बीच निजी प्रतिद्वंद्विता पर आधारित थी। फिल्म की कहानी के अंश उनकी निजी जिंदगी से मिलते-जुलते थे। बड़ी बहन मानसी और छोटी बंसी।
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फिल्म में अरुणा ईरानी और शबाना आजमी ने दोनों बहनों के किरदार निभाये थे। इस फिल्म के रिव्यूज में लता और आशा के साथ किरदारों की समानता को रेखांकित किया गया था। कुछ साल बाद पत्रकार राजीव शुक्ला ने लता मंगेशकर के साथ इंटरव्यू में इस कथित प्रतिद्वंद्विता पर सवाल भी पूछा था, जिसे लता ने पूरी तरह निराधार बताया।
आशा भोसले के निधन के बाद यह क्लिप सोशल मीडिया में सतह पर आ गई है। बातचीत कुछ इस प्रकार थी-
राजीव शुक्ला: आशा जी से भी आपके बड़े मतभेद थे और आशा जी को आपने बढ़ने नहीं दिया अपनी बहन को।
लता मंगेशकर: आशा को बढ़ने नहीं होता तो आशा का आज इतना नाम होता? एक तो आशा हमारे यहां थी नहीं। आशा शादी करके चली गई। उसके बाद उसका नाम हुआ। एक बात, दूसरी बात यह कि आशा का स्टाइल अलग था। मेरा स्टाइल अलग था। हम दोनों बहनें हैं। आवाज भी हमारी बहुत मिलती-जुलती है। पर वो बहुत अलग स्टाइल के गाने गाती थी और मैं अलग स्टाइल के गाती थी। और, बहन के साथ यह करने का तो... मैं कभी सोच ही नहीं सकती थी।
राजीव शुक्ला: तो इतना भ्रम कैसे फैला। एक फिल्म भी बन गई साज। उसमें इतना घुमा-फिराकर स्टोरी उन्होंने देने की कोशिश की...
लता मंगेशकर: हां, वो तो सब लोग कोशिश करते हैं...
राजीव शुक्ला: उस पर एतराज नहीं जताया आपने इस तरह की फिल्म...नाम भले ही बदल दिये हों, उसके रिव्यूज बगैरह यही छपे...
लता मंगेशकर: छपे, मगर वो सब गलत था।
आशा भोसले, लता मंगेशकर चार साल बढ़ी थीं और चार साल बाद ही यह दुनिया छोड़कर गईं। सुरों के साथ एक-दूसरे जुड़ी बहनों की किस्मत भी गुंथी हुई रही। उम्र की तरह संगीत के क्षेत्र में लता का कद भी बड़ा रहा, मगर आशा भोसले इसलिए भी सराहे जाने के काबिल हैं कि लता के विशाल कद के सामने उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई, जो किसी भी तरह लता मंगेशकर के साये में नहीं है। य

