Dharmendra: अपने ‘वीरू’ को याद कर भावुक हुए ‘जय’ अमिताभ बच्चन, बोले- ‘दुनिया बदलती रही, नहीं बदले धर्मेंद्र’

Amitabh Bachchan pens tribute to Dharmendra. Photo- X

मुंबई। Dharmendra Death: हिंदी सिनेमा की कुछ ऑनस्क्रीन जोड़ियों में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी भी शामिल है। दोनों ने कुछ बेहद सफल और आइकॉनिक फिल्मों में साथ काम किया। इनमें से रमेश सिप्पी की शोले भी है। हिंदी सिनेमा की ऐसी कालजयी फिल्म, जिसकी रोशनी आज भी झिलमिला रही है।

इस फिल्म में धर्मेंद्र ने वीरू और अमिताभ बच्चन ने जय का किरदार निभाया था। एक-दूसरे पर जान न्योछावर करने वाले दो दोस्त, जो छोटे-मोटे अपराधी हैं। इस फिल्म की रिलीज को 50 साल हो चुके हैं, मगर जय-वीरू की जोड़ी आद भी दोस्ती की मिसाल मानी जाती है।

सबसे पहले श्मशान पहुंचे अमिताभ बच्चन

सोमवार को जब धर्मेंद्र का निधन हुआ तो श्मशान भूमि पहुंचने वाले सबसे पहले अभिनेताओं में अमिताभ बच्चन शामिल थे, जो बेटे अभिषेक के साथ अपने वीरू को आखिरी विदाई देने पहुंचे। फिल्म में जय ने वीरू की बाहों में दम तोड़ा था, मगर असल जिंदगी में वीरू ने जय को छोड़ दिया।

देर रात अमिताभ ने एक्स पर धर्मेंद्र को याद करते हुए भावुक पोस्ट लिखी- एक और निर्भीक विशालकाय व्यक्तित्व हमें छोड़कर चला गया। अखाड़ा छोड़कर चला गया। अपने पीछे असहनीय आवाज की शांति। धरम जी।

महानता का प्रतीक, सिर्फ अपनी कद-काठी से नहीं, बल्कि विशाल हृदय और लुभाने वाली सादगी। वो अपने साथ पंजाब की मिट्टी की खुशबू लेकर आये और अपने पूरे करियर में मिजाज के साथ आस्थावान रहे। एक ऐसी दुनिया, जो हर दशक बाद बदल जाती है। दुनिया बदलती रही, वो नहीं।

उनकी मुस्कान, आकर्षण और गर्मजोशी, जो भी उनके करीब गया उसने महसूस किया। इस व्यवसाय में यह दुर्लभ है। एक ऐसा निर्वात हो गया है, जो हमेशा खाली रहेगा।

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पहली बार चुपके चुपके में आये साथ

धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी पहली बार ऋषिकेश मुखर्जी की 1975 की फिल्म चुपके चुपके में नजर आई, जो एक पारिवारिक कॉमेडी फिल्म थी। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने परिमल त्रिपाठी नाम के वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर का रोल निभाया था, जबकि अमिताभ अंग्रेजी के प्रोफेसर सुकुमार सिन्हा के रोल में थे। फिल्म की कहानी इन दोनों की अदला-बदली पर आधारित थी। जया भादुड़ी और शर्मिला टैगोर ने फीमेल लीड रोल्स निभाये थे।

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1975 में ही आई शोले, धर्मेंद्र-अमिताभ की जोड़ी की दूसरी फिल्म थी, जिसने सिनेमा में इतिहास रचा। इसके बाद 1980 में आई विजय आनंद की राम बलराम में दोनों कलाकार फिर साथ आये। अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की 1981 की फिल्म नसीब के गाने जॉन जॉनी जनार्दन में धर्मेंद्र ने कैमियो किया।

रजनीकांत की डेब्यू हिंदी फिल्म 1983 की अंधा कानून में हेमा मालिनी ने पैरेलल लीड रोल निभाया था, जबकि अमिताभ ने एक्सटेंडेड कैमियो किया और धर्मेंद्र ने गेस्ट एपीयरेंस दिया।