मुंबई। Ghooskhor Pandat Title Controversy: सोशल मीडिया के दौर में कौन सा विवाद कहां निकल आएगा, कहा नहीं जा सकता। अब नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडत के टाइटल को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
नेटफ्लिक्स ने हाल ही में 2026 की स्लेट के तहत दो दर्जन से अधिक फिल्म और वेब सीरीज की घोषणा की। इनमें से कुछ रिलीज के लिए तैयार हैं, कुछ के आने में वक्त लगेगा।
टाइटल बदलने की मांग को लेकर याचिका
फिल्म में मनोज बाजपेयी लीड रोल में हैं, जबकि नीरज पांडेय निर्देशक हैं। सोशल मीडिया में एलान के बाद से ही इस फिल्म का विरोध शुरू हो गया है और मामला कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया है।
दरअसल, घूसखोर पंडित शीर्षक से ब्राह्मण समाज के कुछ लोग भड़क गये हैं और टाइटल बदलने की मांग को लेकर उन्होंने अदालत की शरण ली है। इन लोगों का कहना है कि फिल्म का टाइटल ब्राह्मण समाज को नीचा दिखाता है और अपमान करता है। इस मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई है।
इस नोटिस में नेटफ्लिक्स के अधिकारियों के साथ लेखक-निर्देशक रितेश शाह और नीरज पांडेय को पार्टी बनाया गया है। याचिका में गया है कि पंडित को भ्रष्टाचार का पर्यायवाची बताना अपमानजनक है और पूरे समुदाय की गरिमा पर हमला है। क्रिएटिव फ्रीडम का मतलब यह नहीं कि सामूहिक रूप से स्टीरियो-टाइप कर दिया जाए।

सोशल मीडिया में भी लोग फिल्म के खिलाफ लिख रहे हैं। उनका कहना है कि फिल्म के निर्देशक और मुख्य कलाकार दोनों ब्राह्मण समाज से आते हैं, उसके बावजूद घूसखोर पंडित टाइटल कैसे रखा गया। टीजर लॉन्च के दौरान मनोज बाजपेयी ने इस किरदार की जानकारी दी थी कि वो एक करप्ट पुलिस वाला है, जो सालों से एक ही पोस्ट पर अटका है। इससे भी लोगों को आपत्ति है।
क्या मोड़ लेगा यह विवाद?
कोर्ट-कचहरी शुरू हो गई है। अब देखते हैं कि यह विवाद कहां तक जाता है। नेटफ्लिक्स फिल्म का टाइटल बदलता है या यह विवाद ही ठंडे बस्ते में चला जाता है। वैसे, अगर टाइटल पर गौर किया जाए तो इसमें पंडित की जगह पंडत लिखा गया है, इस नाम से फिल्म में मनोज के किरदार को पुकारा जाता है, जैसा कि आम जिंदगी में होता है, किसी का उपनाम रख दिया जाता है।
नेटफ्लिक्स ने फर्स्ट लुक टीजर शेयर करने के साथ लिखा है- हर करप्ट ऑफिसर को बदलने का एक मौका मिलता है, अब ऑफिसर अजय दीक्षित की बारी। इस लाइन से फिल्म की कहानी का अंदाजा होता है कि किसी घटना के बाद भ्रष्ट अफसर अजय दीक्षित खुद को बदलता है। इस लिहाज से टाइटल का विरोध करना जल्दबाजी होगी।
वैसे भी, फिल्म का टाइटल कैसे किसी समाज को परिभाषित कर सकता है। यह उस फिल्म की कहानी या किरदार का प्रतिनिधित्व करता है। फिलहाल, फिल्म से जुड़े किसी व्यक्ति या नेटफ्लिक्स ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

