मुंबई। B Saroja Devi Death: साउथ फिल्म इंडस्ट्री से लगातार दूसरे दिन दुखद खबर आई है। 13 जुलाई को दिग्गज अभिनेता कोटा श्रीनिवास राव के निधन से तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में मातम छा गया था तो आज 14 जुलाई को वेटरन एक्ट्रेस बी सरोजा देवी के गुजरने की खबर ने कन्नड़ सिनेमा को गमगीन कर दिया है।
हालांकि, सरोजा देवी सिर्फ कन्नड़ सिनेमा तक सीमित नहीं थीं। उनकी फिल्मी विरासत हिंदी सिनेमा तक फैली हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 87 साल की बी सरोजा देवी का निधन बेंगलुरु में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण हुआ।
कन्नड़ सिनेमा की पहली लेडी सुपरस्टार कही जाने वाली सरोजा देवी ने सात दशक लम्बे करियर में तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा को अपने अभिनय से समृद्ध किया। 60 के दशक में उन्होंने दिलीप कुमार, राजेंद्र कुमार और सुनील दत्त जैसे कलाकारों के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर किया था।
कमल हासन और रजनीकांत ने दी श्रद्धांजलि
दिग्गज अभिनेत्री के निधन पर कमल हासन और रजनीकांत समेत कई कलाकारों ने दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किये। कमल हासन ने लिखा- जब भी उन्होंने मुझे देखा, मेरी उम्र जितनी भी रही, वो अंगुलियों से मेरे गालों को पिंच करके प्यारा बेटा कहती थीं।
सरोजा देवी अम्मा, मेरे लिए दूसरी मां की तरह थीं। एक ऐसी कलाकार, जिन्होंने भाषा और क्षेत्र की हदों से बाहर अभिनय किया। वो चली गईं। मेरी दूसरी फिल्म पर्थल पासी थीरम की शूटिंग से लेकर अनगिनत अविस्मरणीय यादें मेरे दिल को कचोट रही हैं। मां को वो ह्रदय, जिसने सबसे पहले मुझे देखा। मैं शीश नवाकर उन्हें विदाई देता हूं।
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इससे पहले रजनीकांत ने इस खबर को साझा करते हुए लिखा- दिग्गज अदाकारा सरोजा देवी, जिन्होंने करोड़ों दिलों पर राज किया, हमारे बीच नहीं रहीं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।

17 साल की उम्र में किया था डेब्यू
7 जनवरी 1938 को बेंगलुरु में जन्मी सरोजा देवी ने करियर की शुरुआत 1955 में महज 17 साल की उम्र में कन्नड़ फिल्म ‘महाकवि कालिदास’ से की, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर शोहरत दिलवाई।
हिंदी सिनेमा में सरोजा देवी ने 1959 में आई फिल्म ‘पैगाम’ से डेब्यू किया, जिसमें उनके सह-कलाकार दिलीप कुमार थे। एसएस वासन निर्देशित फिल्म में वैजयंती माला फीमेल लीड थीं, जबकि सरोजा देवी ने मिल मालिक की बेटी का किरदार निभाया था, जो दिलीप कुमार को चाहती है। यह दिलीप कुमार और राजकुमार की एक साथ पहली फिल्म थी। इस फिल्म ने उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच भी लोकप्रिय दिलवाई।

इसके बाद उन्होंने ससुराल (1961) में राजेंद्र कुमार के साथ, बेटी बेटे (1964) में सुनील दत्त के साथ, अजीत के साथ ओपेरा हाउस (1961), शम्मी कपूर के साथ ‘प्यार किया तो डरना क्या’ (1963), भारत भूषण के संग दूज का चांद (1964), प्रीत ना जाने रीत (1966), हांगकांग (1962) जैसी फिल्मों में काम किया।

सबसे अधिक फीमेल लीड का रिकॉर्ड
उनकी हिंदी फिल्मों की संख्या भले ही तमिल और कन्नड़ फिल्मों की तुलना में कम थी, लेकिन उनकी अभिनय शैली और स्क्रीन प्रेजेंस ने हिंदी सिनेमा में भी गहरी छाप छोड़ी। उस दौर में उन्हें वैजयंती माला के समकक्ष अभिनेत्री माना जाता था।
1960 के दशक के मध्य तक उन्होंने हिंदी फिल्मों में काम किया, जिसके बाद वह मुख्य रूप से कन्नड़ और तेलुगु सिनेमा में सक्रिय रहीं। एमजीआर और शिवाजी गणेशन के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही थी।
- एमजीआर के साथ दीं क-टू-बैक 26 हिट फिल्में।
- शिवाजी गणेशन के साथ दीं 22 बैक-टू-बैक हिट फिल्में।
- जैमिनी गणेशन के साथ कीं 17 फिल्में
सरोजा देवी ने 1955 से 1984 तक 161 फिल्मों में लगातार मुख्य अभिनेत्री के रूप में काम करके एक विश्व रिकॉर्ड बनाया। उन्हें 1969 में पद्म श्री और 1992 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

