मुंबई। Jana Nayagan Censor Row: तमिल सुपरस्टार विजय की फिल्म जन नायगन के सेंसर सर्टिफिकेट को लेकर हुए विवाद के बाद अब वेटरन एक्टर और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को नये सिरे से देखने की जरूरत व्यक्त की है। इससे पहले राम गोपाल वर्मा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को आउटडेटेड घोषित कर चुके हैं।
सेंसर बोर्ड को सुधार की जरूरत
शनिवार को कमल ने अपने एक्स एकाउंट से स्टेटमेंट जारी किया, जिसमें दिग्गज अभिनेता ने लिखा- ”भारत का संविधान अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी देता है, जो तथ्यों और पारदर्शिता से चलता है। यह मसला किसी एक फिल्म से कहीं बड़ा है। यह एक संवैधानिक प्रजातंत्र में कला और कलाकारों को जगह देता है।
सिनेमा किसी एक की मेहनत का नतीजा नहीं है, बल्कि लेखकों, तकनीशियनों, कलाकारों, प्रदर्शकों और छोटे व्यावसायियों के ईको सिस्टम का सामूहिक प्रयास है, जिनकी आजीविका समयबद्ध प्रक्रिया पर निर्भर करती है। जब स्पष्टता अनुपस्थित रहती है, रचनाशीलता को बांध दिया जाता है, आर्थिक सक्रियता बाधित होती है और लोगों का विश्वास कमजोर होता है।
भारत और तमिलनाडु के सिनेमा प्रेमी कला में जज्बा, विचार और मैच्योरिटी लेकर आते हैं। वे साफगोई और सम्मान के हकदार हैं। इस वक्त जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है, वो है सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया की समयसीमा तय की जाये, व्यवस्था में पारदर्शिताहो और हर कट या एडिट की लिखित में वजह बताई जाए।
यह पूरी फिल्म इंडस्ट्री के एकजुट होने का भी वक्त है, जो साथ में सरकारी संस्थाओं के साथ अर्थपूर्ण संवाद करें। यह सुधारात्मक उपाय रचनात्मक आजादी को सुनिश्चित और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना करेंगे। साथ ही भारतीय संविधान में कलाकारों और जनता के विश्वास को मजबूत करेंगे।”
राम गोपाल वर्मा ने लगाई लताड़
इससे पहले शुक्रवार को राम गोपाल वर्मा ने एक्स पर एक लम्बा नोट लिखकर सेंसर बोर्ड की जमकर आलोचना की। उन्होंने लिखा- सिर्फ विजय की फिल्म जन नायगन के सेंसर विवाद के संदर्भ में ही नहीं, बल्कि वैसे भी आज की तारीख में यह सोचना मूर्खता है कि सेंसर बोर्ड प्रासंगिक रह गया है।
इस नोट में राम गोपाल वर्मा ने लिखा कि सेंसर बोर्ड को इस मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है कि वो तय करेगा, लोग क्या देखें क्या नहीं। आज लोगों के सामने कंटेंट को हासिल करने के कई तरीके हैं। सिर्फ कैंची चलाकर सेंसर बोर्ड कंटेंट को नहीं रोक सकता।
उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन ठीक है। कंटेंट को लेकर चेतावनी भी ठीक है, मगर सेंसरशिप गलत है। सेंसर बोर्ड की प्रसांगिकता की तरफदारी करना बिल्कुल उस चौकीदार की वकालत करने जैसा है, जो ऐसी बिल्डिंग की सुरक्षा कर रहा है, जिसकी दीवारें ढह चुकी हैं और सबको पता है कि अंदर क्या है।

क्या है जन नायगन को लेकर विवाद?
बता दें, विजय की फिल्म जन नायगन 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, मगर सेंसर बोर्ड से सर्टफिकेट ना मिलने के कारण इसकी रिलीज स्थगित करनी पड़ी। निर्माताओं का कहना है कि उन्होंने सेंसर बोर्ड के कहे अनुसार कट्स भी किये, मगर प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। बोर्ड ने फिल्म को एग्जामिनेशन कमेटी में भेजा, जहां एक सदस्य के एतराज करने पर फिल्म का सर्टिफिकेट रोक दिया गया।
मेकर्स सेंसर बोर्ड के ढुलमुल रवैये के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट गये, जहां से 9 जनवरी को फिल्म को यूए कैटेगरी में सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया गया, मगर सीबीएफसी ने कोर्ट के इस फैसले को चैलेंज कर दिया, जिससे सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को स्टे कर दिया गया है। फिल्म के निर्माताओं ने वीडियो जारी करके सारी स्थिति से अवगत करवाते हुए दर्शकों और वितरकों से माफी मांगी है।
एच विनोद निर्देशित जन नायगन एक पॉलिटिकल एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जिसमें विजय पुलिस अधिकारी के किरदार में हैं। फिल्म में पूजा हेगड़े फीमेल लीड हैं, जबकि बॉबी देओल विलेन के रोल में हैं। यह पैन इंडिया फिल्म है, जो हिंदी में जन नेता शीर्षक के साथ रिलीज हो रही है। विजय की पूर्णकालिक राजनीति में जाने से पहले यह आखिरी फिल्म है।

