मुंबई। Tamil Actors Who Became Chief Minister: तमिलनाडु की राजनीति और तमिल सिनेमा का रिश्ता अनोखा और गहरा है। यहां फिल्मी सितारों ने ना सिर्फ लोगों के दिलों पर राज किया है, बल्कि राजनीति में भी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं।
द्रविड़ आंदोलन की शुरुआत से ही सिनेमा को राजनीतिक संदेश पहुंचाने का माध्यम बनाया गया, लेकिन असली बदलाव तब आया, जब दो दिग्गज अभिनेता—एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) और जयललिता—ने सिल्वर स्क्रीन छोड़कर राजनीति में कदम रखा।
वे दोनों ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और अपनी लोकप्रियता से राज्य की राजनीति को नया आयाम दिया। विजय तीसरे तमिल स्टार होंगे, जो एमजीआर और जयललिता के पदचिह्नों पर चलते हुए सिल्वर स्क्रीन से सीएम की कुर्सी तक पहुंचने से कुछ कदम दूर हैं।
एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर): गरीबों के मसीहा से मुख्यमंत्री तक
एम.जी. रामचंद्रन, जिन्हें प्यार से एमजीआर कहा जाता है, तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार थे। उनका जन्म 17 जनवरी 1917 को श्रीलंका के कांकेसंथुराई में हुआ था। बचपन में ही थिएटर और फिल्मों की दुनिया में कदम रखा।
1936 में ‘सती लीला’ फिल्म से डेब्यू किया, लेकिन असली सफलता 1950 के दशक में मिली। एमजीआर की फिल्में सामाजिक न्याय, गरीबों की लड़ाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ थीं। ‘नाडोडी मान्नन’, ‘एंग वीट्टु पिल्लई’, ‘अदिमाई पेन्न’ जैसी फिल्मों में वे गरीबों के रक्षक, किसानों के दोस्त और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले हीरो बनकर उभरे।
उनकी फिल्मों में डबल रोल, एक्शन और भावुकता का अनोखा मिश्रण होता था। तमिलनाडु के गांव-कस्बों में लोग उनकी फिल्में देखकर रोते-हंसते और उन्हें अपना नेता मानने लगे। राजनीति में प्रवेश 1950 के दशक में हुआ।
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वे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) में शामिल हुए। 1967 में उन्होंने विधायक के रूप में चुनाव जीता, लेकिन 1972 में पार्टी के तत्कालीन नेता एम. करुणानिधि से मतभेद के बाद उन्होंने अपनी पार्टी अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआइएडीएमके) की स्थापना की।
1977 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और एमजीआर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन गए। वे 1977 से 1987 तक लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे। उनके शासन में ‘निरंतर सरकार’ की परंपरा शुरू हुई।
मुफ्त चावल योजना, महिलाओं के लिए साइकिल, स्कूलों में मिड-डे मील जैसी कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। 1987 में उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी छवि ‘पुरात्चि थलैवर’ (क्रांतिकारी नेता) के रूप में आज भी जीवित है। 2018 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
जयललिता: चित्रा से ‘अम्मा’ तक
एमजीआर के बाद उनकी सबसे करीबी सहयोगी जयललिता ने ना सिर्फ पार्टी की बागडोर संभाली, बल्कि मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचा। जयललिता जयराम का जन्म 24 फरवरी 1948 को मैसूर (कर्नाटक) में हुआ था। बचपन से ही नृत्य और अभिनय में रुचि थी।
1961 में ‘वेन निरा अडाई’ फिल्म से तमिल सिनेमा में एंट्री की। 1965 से 1972 तक उन्होंने एमजीआर के साथ 28 फिल्मों में काम किया। ‘अनबे वा’, ‘मदुरै वीरन’, ‘नाम नाडु’ जैसी फिल्मों में उनकी जोड़ी दर्शकों के दिलों पर छा गई।

वह ना सिर्फ सुंदर नायिका थीं, बल्कि कुशल नर्तकी और अभिनेत्री भी। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी फिल्मों में काम किया, लेकिन 1972 के बाद राजनीति ने उन्हें बुलाया। एमजीआर की मृत्यु के बाद 1987 में उन्होंने एआइएडीएमके की कमान संभाली।
शुरुआत में चुनौतियां आईं, लेकिन 1991 में वे तमिलनाडु की पहली निर्वाचित महिला मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद 1991 से 201616 तक छह बार मुख्यमंत्री रहीं। वह राज्य की सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
जयललिता को ‘अम्मा’ (मां) के नाम से जाना जाता था। उन्होंने ‘अम्मा कैंटीन’, ‘अम्मा नीडू’ (महिलाओं के लिए सस्ते घर), मुफ्त लैपटॉप, टीवी, साइकिल जैसी योजनाएं शुरू कीं। उनकी शासनशैली कड़ी थी, लेकिन जनकल्याण पर फोकस रहा। 5 दिसंबर 2016 को उनकी मृत्यु ने पूरे राज्य को शोक में डुबो दिया।
सिनेमा और राजनीति का अनोखा मेल
एमजीआर और जयललिता ने साबित कर दिया कि तमिलनाडु में सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जन-जागरण का हथियार है। उनकी फिल्में लोगों को सीधे प्रभावित करती थीं—स्क्रीन पर जो दिखाते थे, वही राजनीति में लागू करते थे। आज भी तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा का प्रभाव दिखता है और विजय जोसेफ राज्य के सीएम बनने के बेहद करीब पहुंच गये हैं।

