मुंबई। Sudesh Kumar Death: भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग के एक प्रमुख अभिनेता और निर्माता सुदेश कुमार धवन (जिन्हें सुदेश कुमार के नाम से जाना जाता था) का 1 मई 2026 को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि उनकी पुत्री मिशिका धवन ने की।
अंतिम संस्कार उसी दिन किया गया। उनके जाने से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
पृथ्वी थिएटर से की शुरुआत
सुदेश कुमार धवन का जन्म 17 मार्च 1931 को पेशावर (वर्तमान पाकिस्तान) में सुदेश प्रकाश धवन के रूप में हुआ था। बचपन से ही अभिनय के प्रति लगाव रखने वाले सुदेश थिएटर की दुनिया में कदम रखा और प्रतिष्ठित पृथ्वी थिएटर समूह के सदस्य बन गए, जिसकी स्थापना पृथ्वीराज कपूर ने की थी।
पृथ्वी थिएटर में काम करते हुए उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई, जिन्होंने उन्हें अपनी फिल्म सरगम (1950) में छोटा रोल दिया। यह उनके फिल्मी सफर की शुरुआत थी। बाद में पृथ्वीराज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म पैसा (1957) में भी भूमिका दी।
1950 के दशक से 1980 के दशक तक सुदेश कुमार ने हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई। वे अपने आकर्षक व्यक्तित्व, मासूम चेहरे और सहज अभिनय के लिए मशहूर थे। उन्होंने मुख्य भूमिकाओं के साथ-साथ सहायक भूमिकाओं में भी दमदार प्रदर्शन किया।
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सारंगा करियर की सबसे यादगार फिल्म
उनके करियर की सबसे यादगार फिल्म सरंगा (1961) रही, जिसमें उन्होंने जयश्री गड़कर के साथ मुख्य भूमिका निभाई। फिल्म में वे राजकुमार सदाबख्श बने और सरदार मलिक के संगीत वाले गीत “सरंगा तेरी याद में”, “हां दीवाना हूं मैं” और “लगी तुमसे लगन” आज भी लोकप्रिय हैं। इस फिल्म ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
साठ के दशक में उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं। इनमें सुनीत दत्त अभिनीत खानदान भी शामिल है, जिसमें वो सुनील दत्त के छोटे भाई बने थे। गोपी में उन्होंने दिलीप कुमार के साथ काम किया था। उनकी प्रमुख फिल्में इस प्रकार हैं:
- सरगम (1950)
- पवन पुत्र हनुमान (1957)
- छोटी बहन (1959)
- बेदर्द जमाना क्या जाने (1959)
- सरंगा (1961)
- ग्रहस्थी (1963)
- वो कौन थी? (1964)
- खानदान (1965)
- मेहरबान (1967)
- वारिस (1969)
- गोपी (1970)
- मन मंदिर (1971)
- गुमराह (1976)
- बदलते रिश्ते (1978)
- जान हथेली पे (1987)
इनके अलावा दयार-ए-हबीब, पाक दामन, मैडम एक्स वाई जेड, पुलिस डिटेक्टिव, प्यार की दास्तान, रॉकेट गर्ल जैसी फिल्मों में भी उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाईं।

1970 में बने प्रोड्यूसर
1970 के दशक के मध्य में उन्होंने फिल्म निर्माण में भी हाथ आजमाया। उन्होंने उलझन (1975) और जान हथेली पे (1987) जैसी फिल्मों का निर्माण किया। सुदेश कुमार का अभिनय थिएटर की गहराई और सिनेमा की व्यापकता का सुंदर मेल था। वे उन गिने-चुने कलाकारों में से थे, जिन्होंने स्वर्ण युग की फिल्मों को अपनी उपस्थिति से रोशन किया।
उनके मासूम चेहरे और सहज अभिनय ने उन्हें परिवार आधारित कहानियों, संगीतमय फिल्मों और रहस्यमयी ड्रामाओं में विशेष जगह दिलाई। उनके निधन पर फिल्म जगत के कई दिग्गजों ने श्रद्धांजलि दी है। कई अभिनेताओं और निर्देशकों ने उन्हें “सिल्वर स्क्रीन का कविराज” और “गोल्डन एरा का मासूम चेहरा” बताया।

