Satluj Zee5 Row: सतलुज फिल्म को लेकर गरमाई पंजाब की राजनीति, AAP ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना, पूछी हटाने की वजह

मुंबई। Satluj Zee5 Row: नब्बे के दौर के पंजाब में पुलिस अत्याचार की कहानी दिखाने वाली फिल्म सतलुज को ओटीटी प्लेटफॉर्म से अचानक हटाये जाने पर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के नेताओं ने जहां केंद्र सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया है, वहीं पंजाब बीजेपी ने कहा कि इस मामले को केंद्र सरकार तक लेकर जाएंगे।

जी5 ने क्यों हटाई सतलुज?

हनी त्रेहन निर्देशित सतलुज एक संवेदनशील और हार्ड हिटिंग फिल्म है, जिसमें पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी दिखाई गई है। खालड़ा ने उग्रवाद के दौर में सामान्य नागरिकों पर पुलिस के अत्याचारों को उजागर करने के लिए मोर्चा खोला था, मगर बाद में उन्हें भी गायब कर दिया गया। दिलजीत दोसांझ ने फिल्म में खालड़ा की भूमिका निभाई है।

2022 की फिल्म सेंसर बोर्ड से प्रमाणित ना होने के कारण सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी थी, मगर 3 जुलाई को लम्बे इंतजार के बाद इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 ने रिलीज कर दिया। फिल्म के रिलीज होते ही सोशल मीडिया में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई और फिल्म में दिखाई गई घटनाओं को लेकर लोग प्रतिक्रिया देने लगे।

मगर, 5 जुलाई को जी5 ने अचानक फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाने की घोषणा की। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने कोई वजह तो नहीं बताई, मगर कानूनी विकल्प देखने की बात जरूर कही। साथ ही फिल्म को जल्द प्लेटफॉर्म पर वापस लाने का वादा भी किया। यहां बता दें कि सतलुज सिर्फ भारत में नहीं देखी जा सकेगी, मगर ओवरसीज में जी5 पर उपलब्ध है।

यह भी पढ़ें: Satluj Zee5 Row: रिलीज के दो दिनों बाद सतलुज को प्लेटफॉर्म से हटाने पर भड़के लोग, वरुण ग्रोवर बोले- ‘डरपोक है सेंसर बोर्ड’

पंजाब की सियासत में छाई सतलुज

सतलुज को हटाये जाने की खबर फैलते ही पंजाब की सियासत में भी हलचल मच गई और नेताओं की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। मंगलवार को पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने मंगलवार को कहा- सरदार जसवंत सिंह खालड़ा जी के जीवन पर बनी फिल्म सतलुज को दो दिन बाद ही ओटीटी से हटा देना… बीजेपी वही राजनीति कर रही है, जो कांग्रेस ने की थी। यह कोई फिक्शन फिल्म नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई की जांच के दस्तावेजों पर आधारित है। मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। सच दिखाने वाली डॉक्युमेंट्री है। कांग्रेस, बीजेपी और बादल पंजाब के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाए उन्हें कुरेद रहे हैं। मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहूंगा कि पंजाब यह सब बर्दाश्त नहीं करेगा। आप खुलकर कारण बताओ, बहस करो, क्यों हटाई गई है। पंजाब को यूं ही बदनाम मत करो।

आप एमपी मलविंदर सिंह कांग ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत सरकार के यह बहुत भेदभाव करने वाला आचरण है। यह फिल्म पंजाब की सच्चाई पर आधारित है। पंजाब में जिस तरह कत्लेआम हुआ था, नौजवानों को मारा गया, मानवीय अधिकारों का उल्लंघन हुआ और मानवाधिकार कार्यकर्ती जसवंत सिंह खालड़ा ने जिस तरह से इसकी विस्तार से जांच की थी, उस पर एक्शन तो क्या ही लेते, खालड़ा साहब को भी शहीद कर दिया।

इस त्रासदी पर दिलजीत दोसांझ जी ने फिल्म बनाई, जिसे पहले तो 5 साल रोककर रखा, सतलुज के नाम से जब रिलीज हुई तो उसे फिर रोक दिया। भारत सरकार का रवैया बहुत भेदभाव वाला है। द कश्मीर फाइल्स, द केरल स्टोरी… जिन फिल्मों से उन्हें लगता है कि भारत सरकार को फायदा होगा, उन्हें खुलेआम परमिशन दे दी और जो फिल्म पंजाब पर हुए अत्याचार को दिखाती है, उसे रोका जा रहा है। भारत सरकार से मैं कहना चाहता हूं कि फिल्म को रिलीज किया जाए।

इससे पहले पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम और शिरोमणि अकाली देल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को एक्स पर लिखा था- भारत में जी5 पर सतलुज को हटाने से हैरान और दुखी हूं। एक पॉवरफुल फिल्म, जो पंजाब के दर्दनाक इतिहास से पर्दा उठाने के साथ जसवंत सिंह जी खालड़ा के बलिदान को दिखाती है, उसे इस तरह खामोश नहीं किया जा सकता।

यह महज सेंसरशिप नहीं है। यह हमारी सामूहिक यादों, सच और अभिव्यक्त की आजादी पर हमला है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का सामना ईमानदारी से करना चाहिए, ना कि इसे दबाया जाना चाहिए।

उधर, पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मंगलवार को मीडिया इंटरेक्शन में कहा कि वो इस मामले को संगठन के अध्यक्ष के सामने ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं इसका रीजन पता कर रहा हूं और हम इसे टेकअप कर रहे हैं।

नब्बे के पंजाब की सुलगती कहानी सतलुज

सतलुज 90 के दौर के पंजाब में ले जाती है, जब राज्य में उग्रवाद चरम पर था। उसे रोकने के लिए पंजाब पुलिस ने जबरदस्त बल प्रयोग किया था, जिसके चलते पुलिस पर गम्भीर आरोप लगे कि उग्रवाद रोकने के नाम पर हजारों लोगों को मारकर दफ्ना दिया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने निजी स्तर पर जांच करके सबूत और ऐसे तमाम लोगों के नाम इकट्ठा किये थे, जो अचानक गायब हो गये थे।

बाद में खालड़ा को भी पुलिस उठाकर ले गई और वो कभी लौटकर नहीं आये। फिल्म दिलजीत दोसांझ ने खालड़ा का किरदार निभाया है। अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की भी अहम किरदारों में हैं। पंजाब 95 टाइटल से बनकर तैयार हुई 2022 की फिल्म सेंसर में अटकने के कारण थिएटर्स में रिलीज नहीं हो सकी और 3 जुलाई को जी5 ने प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया।