Pradeep Singh Rawat Death: नहीं रहे ‘अश्वत्थामा’! महाभारत फेम दिग्गज अभिनेता का 74 साल की उम्र में निधन

Pradeep Singh Rawat passes away at 74. Photo- X

मुंबई। Pradeep Singh Rawat Death: महाभारत के युद्ध में गुरु द्रोणाचार्य जब अपने बाणों से पांडवों की सेना पर कहर बरपा रहे थे तो युधिष्ठिर के खेमे में खेमे में हाहाकार मच गया। उपाय सोचे जाने लगे कि कैसे द्रोणाचार्य को इस विनाश से रोका जाए। भगवान कृष्ण ने उपाय सोचा।

अगले दिन युद्धभूमि में चारों तरफ शोर मच गया- अश्वत्थामा मारा गया… अपने जिगर के टुकड़े की मौत की खबर ने गुरु द्रोणाचार्य को विचलित कर दिया। समाचार की पुष्टि के लिए द्रोणाचार्य ने धर्मात्मा युधिष्ठिर से पूछा। उन्होंने इसे सत्य बताया। हालांकि, यह पूरा सत्य नहीं था। फिर भी गुरु द्रोण बेटे की मौत का दुख बर्दाश्त नहीं कर सके और हथियार डाल दिये।

बाद में पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए अश्वत्थामा ने पांडव कैम्प में आग लगा दी थी, जिसमें कई मासूम जानें गईं। तब भगवान कृष्ण ने अश्वत्थामा को अमर होने का श्राप दिया, ताकि वो जीवित रहकर मृत्युलोक में भटकते हुए अपने कर्मों की सजा भुगते।

बीआर चोपड़ा ने जब अस्सी के दौर में महाभारत बनाई तो अश्वत्थामा का रोल अभिनेता प्रदीप सिंह रावत ने निभाया था, जो आज तक उनकी पहचान है। महाभारत का अश्वत्थामा तो चिरंजीवी है, मगर प्रदीप सिंह रावत ने इस संसार को अलविदा कह दिया। मंगलवार शाम उनका बीमारी के चलते 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

कैंसर से जूझ रहे थे प्रदीप

वह पिछले कई वर्षों से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे। कैंसर एक बार ठीक होने के बाद कुछ महीनों पहले लौट आया था। प्रदीप मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में इलाज करा रहे थे और बाद में उन्हें भिवंडी के एक कैंसर स्पेशलिटी अस्पताल में शिफ्ट किया गया। उनके मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 6 से 6:30 बजे प्लेटलेट काउंट अचानक गिरने के बाद वे नहीं बच सके।

प्रदीप रावत का जन्म 21 जनवरी 1952 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। वह अपने पीछे पत्नी कल्याणी रावत और बेटे विक्रमादित्य को छोड़ गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतिम संस्कार 5 अगस्त को मुंबई में किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को गोरेगांव स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।

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प्रमुख भूमिकाएं और करियर

प्रदीप रावत ने चार दशकों से अधिक का करियर हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, भोजपुरी, नेपाली और मराठी सिनेमा में बिताया। उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। वे मुख्य रूप से दमदार विलेन और चरित्र अभिनेता के रूप में जाने जाते थे।

उन्हें सबसे बड़ी पहचान बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक टीवी धारावाहिक महाभारत (1988) में अश्वत्थामा की भूमिका से मिली। इसके बाद उन्होंने तहकीकात, चंद्रकांता और युग जैसे धारावाहिकों में भी काम किया। फिल्मों में उनकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई। मेरी जंग (1985) और एतबार जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में एंट्री की।

आमिर खान के साथ उन्होंने फिल्मों में यादगार किरदार निभाये, जिनमें सरफरोश (1999) का सुल्तान, लगान (2001) का देवा सिंह सोढ़ी (सिक्ख बल्लेबाज) और गजनी (2008) का खूंखार विलेन गजनी धर्मात्मा शामिल हैं।

दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी उन्होंने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। एस.एस. राजामौली की तेलुगु फिल्म साई (Sye, 2004) में बिख्शु यादव की भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला। तमिल गजनी, जिल्ला, वीरम और कई अन्य फिल्मों में भी वे नजर आए।

हिंदी सिनेमा में उनकी आखिरी रिलीज 2025 की छावा है, जिसमें उन्होंने येसाजी कांक का किरदार निभाया था। वह ऑफ-स्क्रीन शांत और विनम्र स्वभाव के थे, जबकि स्क्रीन पर उनकी प्रेजेंस बहुत प्रभावशाली रहती थी।

श्रद्धांजलियां

निधन की खबर फैलते ही फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। लगान में उनके सह-कलाकार यशपाल शर्मा ने इंस्टाग्राम पर लिखा: “प्रदीप रावत, हमारे गजनी, लगान के देवा, RIP।” महाभारत के युधिष्ठिर गजेंद्र चौहान ने कहा: “ओम शांति ओम शांति। हमारे मित्र और सहयोगी प्रदीप रावत, जिन्होंने महाभारत में अश्वत्थामा निभाया, का निधन हो गया।”

सोनू सूद ने भी भावुक पोस्ट कर उन्हें “प्रदीप रावत भाई” कहकर याद किया और कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस होगी।

सोशल मीडिया पर फैंस ने उन्हें अश्वत्थामा, गजनी और लगान के देवा के रूप में याद करते हुए शोक संदेश लिखे। कई लोगों ने उनके नेगेटिव रोल्स की गहराई और स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की। प्रदीप रावत का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी यादगार भूमिकाएं लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में जिंदा रहेंगी।