छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिये बयान पर सियासी बवाल के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी, रितेश देशमुख ने लिखी करारी पोस्ट

Riteish Deshmukh criticizes Dheerendra Shastri. Photo- X

मुंबई। Dheerendra Shashtri Shivaji Controversy: नागपुर में 25 अप्रैल 2026 को हुए एक धार्मिक कार्यक्रम में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) के छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए गए बयान ने पूरे महाराष्ट्र में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।

बयान को ऐतिहासिक रूप से गलत और शिवाजी के प्रति अपमानजनक माना गया। विपक्षी दलों ने इसे इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना बताया, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रमाणिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं है।

अपकमिंग फिल्म राजा शिवाजी में शीर्षक किरदार निभा रहे रितेश देशमुख ने शास्त्री के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया। मामला बढ़ते देख शास्त्री ने स्पष्टीकरण देते हुए माफी भी मांग ली।

क्या था धीरेंद्र शास्त्री का बयान?

24-25 अप्रैल 2026 को नागपुर के जमथा में भारत दुर्गा शक्तिस्थल के शिलान्यास समारोह और धर्मसभा के दौरान यह विवाद हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे।

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने प्रवचन में शिवाजी महाराज से संबंधित एक कहानी सुनाई, जो इस प्रकार है:

“छत्रपति शिवाजी महाराज युद्ध लड़ते-लड़ते बहुत थक गए थे। एक दिन वे समर्थ गुरु रामदास स्वामी के पास गए। उन्होंने अपना मुकुट उतारकर उनके चरणों में रख दिया और कहा, ‘मैं अब युद्ध नहीं लड़ना चाहता। आप इस मुकुट को संभाल लीजिए, इस राज्य को देख लीजिए।

हम आपके आदेश का पालन करेंगे। हम बहुत थक गए हैं, आराम करना चाहते हैं, कुछ दिनों के लिए कुछ नहीं करना चाहते। शिवाजी महाराज ने रामदास स्वामी को राज्य की बागडोर सौंपने की इच्छा जताई थी।”

धीरेंद्र शास्त्री की इस कहानी से बवाल मच गया। बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और महाराष्ट्र में आक्रोश की लहर दौड़ गई।

रितेश देशमुख की पोस्ट

फिल्म अभिनेता रितेश देशमुख ने किसी का नाम लिये बगैर एक्स पर लिखा-

“जब कोई हमारे यहां आकर हमारे पूज्यनीयों के खिलाफ बकवास करता है, शिव प्रेमी शिव भक्त होने के नाते यह पूरी तरह अस्वीकार्य और आक्रोशित करने वाला है। महान लोगों को एक निश्चित खांचे में ढालने की ऐसी क्षुद्र कोशिशें समय के साथ खत्म हो जाएंगी।

लेकिन, सदियों से खड़े सहयाद्री के पर्वतों की तरह वो नाम आने वाले करोड़ों सालों त मजबूती से डटा रहेगा। और वो नाम है क्षत्रिय वंश के प्रताप पुरंदर, सिंहासन के स्वामी, सम्राटों के सम्राट, राजाशिव छत्रपति महाराज।”

इतिहासकारों और मराठा संगठनों ने भी बयान को “लोककथा” या “अप्रमाणित” बताया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी के बीच ऐसा कोई प्रमाणिक उल्लेख नहीं है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक में पत्रकारों से कहा, “महाराष्ट्र के प्रमाणिक ग्रंथों या इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता। महान व्यक्तियों के बारे में लोककथाएं अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती हैं।”

धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने पर शास्त्री 26 अप्रैल को माफी मांग ली। उन्होंने कहा- “कुछ लोगों ने मेरे वक्तव्य का गलत अर्थ निकाला। जिनके स्वराज्य से प्रेरणा लेकर हम हिंदू राष्ट्र का संकल्प कर रहे हैं, उनकी अवमानना तो दूर, सपने में भी कोई निंदा सहन नहीं करेगा। अगर मेरे वक्तव्य से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं मन से माफी मांगता हूं।”

उन्होंने जोर दिया, “मैं छत्रपति शिवाजी महाराज को मानता हूं, उनके स्वराज्य के सपने के लिए जीता हूं। हमारी हिंदुत्व की विचारधारा उन्हीं से आई है। जो शिवाजी महाराज को मानते हैं, वे सब हमारे लोग हैं। आपस में विवाद करने से फायदा दूसरों को होगा।”