मुंबई। Satluj Zee5 Row: सेंसर बोर्ड के साथ लम्बी लड़ाई के लिए खबरों में रही हनी त्रेहन की विवादित फिल्म सतलुज एक बार फिर चर्चा में है। सेंसर बोर्ड से लम्बी लड़ाई के बावजूद इसे सर्टिफाई नहीं किया गया, जिसके चलते फिल्म भारत में रिलीज नहीं हो सकी।
जैसे-तैसे जी5 पर रिलीज हुई, मगर दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म ने हटा दिया। सतलुज को इस तरह बिना कोई ठोस कारण बताये प्लेटफॉर्म से हटाने पर सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। यूजर्स से लेकर सेलिब्रिटीज तक इस पर कड़ी टिप्पणी कर रहे हैं और फिल्म के साथ होने वाले बर्ताव को लेकर तंज कस कर रहे हैं। साथ ही सेंसर बोर्ड को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
3 जुलाई को जी5 पर आई, 5 को हटाई
सतलुज 3 जुलाई को जी5 पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध करवाई गई थी। देखते ही देखते फिल्म सोशल मीडिया की चर्चाओं में छा गई। जिसने भी फिल्म देखी, उसने फिल्म की तारीफ की। रिव्यूज में भी फिल्म हिट रही और ज्यादातर समीक्षकों ने 4-5 स्टार्स तक दिये।
मगर, फिर अचानक 5 जुलाई को जी5 ने सोशल मीडिया के जरिए फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाने का एलान कर दिया। हालांकि, इसकी कोई वजह नहीं बताई। इतना जरूर कहा कि हम इसे वापस लाने की पूरी कोशिश में कर रहे हैं।
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सतलुज, सेंसर बोर्ड और सोशल मीडिया
फिल्म के हटने की खबर फैलते ही सोशल मीडिया में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। यूजर्स जी5 की मजम्मत करने लगे। वहीं, कुछ लोग सेंसर बोर्ड को कोसने लगे। सोमवार को कुछ लोगों ने पूरी फिल्म एक्स पर अपलोड कर दी, ताकि फिल्म को दबाने की कोशिशें कामयाब ना हों। फिल्म के मुख्य अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी एक वीडियो में कहा कि अब उन्हें कोई चिंता नहीं। फिल्म लोगों तक पहुंच गई है। वो डाउनलोड करके इसे देख लेंगे।
हालांकि, जी5 ने आज (6 जुलाई) को फिल्म वापस लाने का अपना कमिटमेंट दोहराते हुए पाइरेसी ना करने की गुजारिश लोगों से की। जी5 के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडलों से लिखा गया- हमें पूरी उम्मीद है और जो भी सम्भव है, वो कर रहे हैं। कृपया, पाइरेसी को सपोर्ट ना करें। हम सतलुज को आप तक पहुंचाने के लिए हर सम्भव तरीका अपना रहे हैं।
उधर, सतलुज को अचानक हटाने पर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने भी मोर्चा सम्भाल लिया और इसके खिलाफ सोशल मीडिया में लिखने लगे। गीतकार और निर्देशक वरुण ग्रोवर ने एक्स पर लिखा- हम जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा डरपोक और बेशर्म है हमारा सेंसर बोर्ड।

अभिनेता रणवीर शौरी ने लिखा- सतलुज को हटा दिया गया है, यह सुनकर घोर निराशा हुई। इस फिल्म को देखना चाहता था। एक ऐसी जमीन, जिसका इतिहास और विरासत काफी पुराना है और जिसके बारे में खूब कहानियां सुनी हैं। मुझे नहीं पता कि हम दफ्न करने की संस्कृति को बढ़ावा क्यों देते रहते हैं।

निर्माता-निर्देशक संजय गुप्ता ने भी सतलुज को इस तरह अचानक हटाये जाने पर हैरानी जताई।

अब आपको बताते हैं कि आखिर सतलुज में ऐसा क्या है कि सेंसर बोर्ड इसे सर्टिफाई नहीं कर रहा और क्यों सरकारें इसे जनता तक नहीं पहुंचने देना चाहतीं?
क्यों डरा रही है सतलुज?
सतलुज हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित एक पॉवरफुल हिंदी-पंजाबी बायोपिक फिल्म है। इसमें दिलजीत दोसांझ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाते हैं। फिल्म 1980-90 के दशक के पंजाब उग्रवाद काल पर को दिखाती है।
इसमें खालड़ा के नजरिए से पुलिस द्वारा किए गए हजारों अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं और गुप्त दाह संस्कारों की जांच की कहानी दिखाई गई है। उन्होंने म्यूनिसिपल रिकॉर्ड और शवदाह गृहों के लॉग से सबूत इकट्ठा कर राज्य द्वारा प्रायोजित हिंसा का खुलासा किया था।
फिल्म को शुरू में घल्लूघारा नाम दिया गया था, जो बाद में पंजाब 95 और अंत में सतलुज हो गया। इसे 2022 के अंत में सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) के पास प्रमाणन के लिए भेजा गया था। सिनेमाघरों में रिलीज की पूरी तैयारी थी, लेकिन फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं मिल सका।
सीबीएफसी ने शुरू में 21 कट्स की मांग की और बाद में यह संख्या 120-127 तक पहुंच गई। बोर्ड ने पुलिस से जुड़े संवेदनशील दृश्यों, नामों और कुछ संदर्भों को हटाने को कहा। कारण था फिल्म में राज्य मशीनरी और पुलिस के अत्याचारों का यथार्थ चित्रण था, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए संवेदनशील माना गया।
मेकर्स किसी भी कट पर राजी नहीं हुए और बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। चार साल के लंबे संघर्ष के बाद फिल्म बिना किसी कट के 3 जुलाई 2026 को Zee5 पर रिलीज हुई, हालांकि भारत में दो दिन बाद हटा दी गई। हैरानी इस बात की भी है कि ओटीटी फिलहाल सेंसर बोर्ड के दायरे में नहीं आता। फिर भी फिल्म पर अघोषित बैन लगा दिया गया है। फिल्म भारत में जी5 पर नहीं देखी जा सकती, मगर ओवरसीज में उपलब्ध है। फिल्म में दिलजीत के साथ अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की अहम किरदारों में हैं।

