मुंबई। Made in India- A Titan Story: देश के इतिहास में इतनी कहानियां छिपी हुई हैं कि अगर उन्हें सही स्टार कास्ट और निर्देशन के साथ पर्दे पर उतारा जाए तो दर्शक प्यार लुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इसी ताजा मिसाल वेब सीरीज मेड इन इंडिया- अ टाइटन स्टोरी है, जो हाल ही में ओटीटी पर रिलीज हुई वेब सीरीजों के बीच सबसे सफल साबित हुई है।
दर्शक इसकी प्रेरणाप्रद कहानी, बेमिसाल अभिनय और इमोशनल कनेक्शन की जमकर तारीफ कर रहे हैं और इससे जुड़ रहे हैं। जिम सरभ, नसीरुद्दीन शाह, वैभव तत्ववादी, नमिता दुबे, कावेरी सेठ और लक्ष्मवीर सरन अभिनीत यह सीरीज अमेजन एमएक्स प्लेयर और प्राइम वीडियो पर दुनिया भर में स्ट्रीम हो रही है।
इस सफलता से उत्साहित निर्माता टी-सीरीज और ऑलमाइी मोशन पिक्चर इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए कॉर्पोरेट जगत की कहानियां लेकर आ रहे हैं।
टाटा फैमिली और कॉफी किंग पर प्रस्तावित सीरीज
मेड इन इंडिया विनय कामत की किताब ‘टाइटन: इनसाइड इंडियाज मोस्ट सक्सेसफुल कंज्यूमर ब्रांड’ पर आधारित है, जिसके अधिकार प्रोड्यूसर सुनील बोहरा द्वारा प्राप्त किए गए थे।
इस विजन को आगे बढ़ाते हुए प्रोड्यूसर भूषण कुमार और सुनील बोहरा की ऑलमाइटी मोशन पिक्चर आइकॉनिक टाटा परिवार की प्रेरणादायक कहानी पर भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने आगामी किताब ‘कॉफी किंग: द स्विफ्ट राइज एंड सडन डेथ ऑफ कैफे कॉफी डे फाउंडर वी. जी. सिद्धार्थ’ के अडेप्टेशन राइट्स भी हासिल कर लिए हैं और साथ मिलकर कई अन्य प्रेरणादायक कहानियां बना रहे हैं।
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मेड इन इंडिया कैसे बनी अ सक्सेस स्टोरी?
दुनिया भर में सराहना बटोरने से लेकर रिलीज के सिर्फ पांच दिनों में 4.5 मिलियन व्यूज हासिल करने तक, यह शो दर्शकों के दिलों को छू चुका है। अमूल ब्रांड ने भी टॉपिकल ट्रिब्यूट दिया, जिसका टैगलाइन था: “मेड इन इंडिया- अए बिटिन’ स्टोरी। घड़ी घड़ी खाओ।”
इसके अलावा, भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स ने सीरीज से प्रेरित एक खास स्मारक पोस्टकार्ड और लिफाफा जारी किया, जो देश भर के दर्शकों के दिलों में गहराई से बस चुकी इस कहानी को सम्मानित करता है।
भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, प्रभलीन सन्धु और टी-सीरीज के को-प्रोड्यूसर (फिल्म्स) व हेड ऑफ ओरिजिनल्स शिव चनाना द्वारा प्रोड्यूस की गई इस सीरीज का लेखन कृति करण व्यास ने किया है और निर्देशन रॉबी ग्रेवाल का है।

Interesting Facts About Series
- प्रोडक्शन टीम ने कथित तौर पर पीरियड डिटेलिंग पर खूब मेहनत की- कॉस्ट्यूम, ऑफिस इंटीरियर, पुरानी विज्ञापन शैली और इंडस्ट्रियल सेटअप से लेकर 70 के अंत और 80 के दशक के भारत को दोबारा गढ़ा गया।
- जिम सरभ ने खुलासा किया कि उनके करियर का लगभग 80–90% हिस्सा वास्तविक जीवन की हस्तियों को निभाने में बीता है, इसलिए ‘मेड इन इंडिया’ उनकी बढ़ती हुई बायोपिक भूमिकाओं की सूची में एक और कड़ी है।
- नसीरुद्दीन शाह इतनी तैयारी के साथ सेट पर आए कि सह-कलाकारों ने बताया कि कई सीन पहली टेक में ही लॉक हो गए थे।
- क्रिएटर्स (टी-सीरीज फिल्म्स) ने सीरीज में क्लासिक हिंदी गीतों का इस्तेमाल किया ताकि 1980 के दशक के भारत की भावनात्मक नॉस्टैल्जिया और माहौल को फिर से जीवंत किया जा सके।
- असली टाइटन फाउंडर जरक्स देसाई का बहुत कम आर्काइवल फुटेज उपलब्ध होने के कारण जिम सरभ ने किरदार को सच्चाई के साथ गढ़ने के लिए रिसर्च, बातचीत और अपनी अंतर्बोध पर बहुत ज्यादा भरोसा किया।
- जिम सरभ ने भूमिका के लिए विग इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया और रोज आधा सिर मुंडवाकर जरक्स देसाई के बॉल्ड लुक को यथार्थपूर्ण ढंग से पेश किया। अभिनेता ने माना कि शूटिंग के दौरान उन्हें ऑफ-कैमरा लगातार कैप और हैट पहननी पड़ती थी।
- मेकर्स ने आर्काइवल फुटेज, रेट्रो बॉलीवुड संगीत, विन्टेज ब्यूटी सेंस और पुरानी शैली के प्रोडक्शन डिजाइन का इस्तेमाल कर आजादी के बाद के भारत का मूड फिर से गढ़ा।
- समीक्षकों ने निर्देशक रॉबी ग्रेवाल की तारीफ की है कि उन्होंने घड़ियों की कहानी को भावनात्मक रूप से आकर्षक और मेनस्ट्रीम ओटीटी ड्रामा में बदल दिया, जबकि विषय को इस फॉर्मेट के लिए अपरंपरागत माना जाता था। अपने दमदार अभिनय, नॉस्टैल्जिक वर्ल्ड-बिल्डिंग और भावनात्मक रूप से जमीन से जुड़ी कहानी कहने के कारण ‘मेड इन इंडिया : ए टाइटन स्टोरी’ अब सिर्फ एक कॉर्पोरेट ड्रामा नहीं रह गई है, बल्कि महत्वाकांक्षा, नवाचार और बदलते भारत की भावना को समर्पित एक हार्दिक ट्रिब्यूट बन गई है।

