Asha Bhosle Death: हिंदी सिनेमा की लीजेंड्री सिंगर आशा भोसले का 92 साल की आयु में निधन, मुंबई के अस्पताल में थीं भर्ती

Asha Bhosle breathes her last in Mumbai. Photo- Instagram

मुंबई। Asha Bhosle Death: हिंदी सनेमा की लीजेंड्री गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में रविवार को निधन हो गया। आशा को चेस्ट इन्फेक्शन की शिकायत के बाद शनिवार को मुंबई के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां चिकित्सक उनका इलाज कर रहे थे।

आशा की पोती जनाई भोसले ने सोशल मीडिया के जरिए उनके स्वास्थ्य की जानकारी दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की थी। लीजेंड्री गायिका के निधन से फिल्म जगत में शोक के लहर छा गई है। सोशल मीडिया के जरिए इंडस्ट्री के लोग और फैंस उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

पिता से मिली संगीत की शिक्षा

आशा भोसले ने सात दशकों से अधिक के करियर में 12,000 से अधिक गाने गाए। 20 से अधिक भाषाओं में अपनी बेमिसाल आवाज़ का जादू बिखेरने वाली आशा ताई को ‘सबसे अधिक गाने गाने वाली गायिका’ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मिला था। उनकी आवाज़ ने कैबरे से लेकर गजल, पॉप से शास्त्रीय तक हर शैली को नई ऊंचाई दी।

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933) महाराष्ट्र के सांगली जिले के गोअर गांव में एक गोमांतक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध गायक और रंगमंच कलाकार थे, जिन्होंने उन्हें बचपन में ही शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी।

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10 साल की उम्र में गाया पहला गाना

जब आशा मात्र 9 वर्ष की थीं, पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। परिवार पुणे से कोल्हापुर होते हुए मुंबई पहुंचा। परिवार की मदद के लिए आशा और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने फिल्मों में गाना और अभिनय शुरू कर दिया।

आशा ने मात्र 10 साल की उम्र में पहला गाना गाया। 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ में उनका पहला गाना रिकॉर्ड हुआ। हिंदी सिनेमा में आगाज 1948 में फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने ‘सावन आया’ से हुआ। शुरुआती दौर में उन्हें ‘बी’ और ‘सी’ ग्रेड फिल्मों के गाने मिले, लेकिन मेहनत और लगन ने उन्हें मुख्यधारा में जगह दिलाई।

लोकप्रिय गानेआशा भोसले की आवाज ने हजारों गीतों को अमर बना दिया। उनके कुछ सबसे लोकप्रिय और यादगार गाने:

  • ‘पिया तू अब तो आजा’ (कारवां, 1971) – कैबरे स्टाइल का मास्टरपीस, जो आज भी डांस फ्लोर पर छा जाता है।
  • ‘दम मारो दम’ (हरे राम हरे कृष्ण, 1971) – पीढ़ियों को जोड़ने वाला पॉप गाना।
  • ‘ये मेरा दिल’ (डॉन, 1978) – हेलन की ऑन-स्क्रीन एनर्जी का पर्याय।
  • ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ और ‘आजा आजा’ (तीसरी मंजिल, 1966) – आर.डी. बर्मन के साथ जादुई जोड़ी का कमाल।
  • ‘उड़े जब जब जुल्फें तेरी’ (नया दौर, 1957) – ओ.पी. नैयर के साथ पहली बड़ी सफलता।
  • ‘दिल चीज़ क्या है’ (उमराव जान, 1981) – ग़ज़ल की मिसाल, जिसने उनकी क्लासिकल गायकी का लोहा मनवाया।
  • ‘चैन से हमको कभी’ (प्राण जाये पर वचन न जाये, 1974) – फिल्म से कटे होने के बावजूद फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाला अनोखा गाना।

आर.डी. बर्मन (जिनसे उनका विवाह भी हुआ), ओ.पी. नैयर, खय्याम, एस.डी. बर्मन और ए.आर. रहमान जैसे संगीतकारों के साथ उनकी जोड़ी ने सिनेमा के इतिहास को बदला।

ग्रैमी अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन

आशा भोसले ने ना सिर्फ गाने गाए, बल्कि महिला पार्श्व गायिकाओं के लिए नए रास्ते खोले। उन्होंने फिल्मी गीतों के अलावा भजन, कव्वाली, रवींद्र संगीत और पॉप भी गाए। 1997 में वे पहली भारतीय गायिका बनीं जिन्हें ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नामांकित किया गया (एल्बम ‘Legacy’ के लिए)।

2011 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें संगीत इतिहास की सबसे अधिक रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार घोषित किया।उन्होंने 1995 की फिल्म ‘रंगीला’ के जरिए 62 साल की उम्र में भी नई पीढ़ी को अपनी आवाज़ का जादू दिखाया। ‘तन्हा तन्हा’ और ‘रंगीला रे’ जैसे गाने आज भी युवाओं के प्लेलिस्ट में शामिल हैं।

अवॉर्ड्स और सम्मानआशा भोसले को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले:

  • 2 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार – ‘उमराव जान’ (1981) और ‘इजाजत’ (1987) के लिए बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर।
  • 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर) – 1968, 1969, 1972, 1973, 1974, 1975, 1979।
  • फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड (1996 – ‘रंगीला’) और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2001)।
  • दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड (2000) – भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान।
  • पद्म विभूषण (2008) – भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • 18 महाराष्ट्र राज्य फिल्म अवॉर्ड्स, 4 बीएफजेए अवॉर्ड्स और अन्य कई सम्मान।

आशा भोसले ने ना सिर्फ संगीत जगत को समृद्ध किया, बल्कि अपनी बहुमुखी प्रतिभा से साबित किया कि आवाज की उम्र नहीं होती। उनकी धुनें आज भी हर दिल में गूंजती हैं। सिनेमा प्रेमियों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।